September 17, 2021

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पढ़ने के लिए बच्चे न आम बेचें, न खुदकुशी करें, झारखंड पुलिस ने बनाया “स्मार्ट बैंक”

राँची   | पुलिस ने योजना का पूरा खाका तैयार किया है. पुलिस कप्तान के निर्देश के बाद सभी ज़िलों के पुलिस कप्तानों ने इसे अमल में लाने की कवायद शुरू कर दी है. 10 दिनों के भीतर थानों में स्मार्ट फोन बैंक शुरू होने के दावे हैं……………………………………………..

रांची. कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को लेकर चर्चा काफी है, लेकिन देश में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जिनके पास इस तरीके से पढ़ने के लिए स्मार्ट फोन, लैपटॉप और इंटरनेट जैसी सुविधाएं ही नहीं हैं. पिछले दिनों दो घटनाएं सामने आईं, जिनके चलते झारखंड पुलिस के कप्तान के दिमाग में एक प्रयोग सूझा, जिसने एक नई योजना का रूप लिया. इस योजना के बारे में पूरी जानकारी से पहले उन दो घटनाओं को देखें, जो इस पहल की बुनियाद बनीं. डीजीपी ने बनाया गैजेट्स बैंक | झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा ने इन दो घटनाओं को जानने के बाद आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए मदद करने की तरकीब के बारे में सोचा और कई स्तरों पर बातचीत के बाद एक पहल शुरू की. राज्य के सभी थानों में उपकरण यानी गैजेट्स बैंक खोलने का निर्णय लिया.

कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत खोले जाने वाले इस बैंक में लोग अपने घर में बेकार पड़े लैपटॉप, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप थाने में मदद के तौर पर जमा करवा सकते हैं, जो ज़रूरतमंदों तक पहुंचाएं जाएंगे. झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा ने कहा कि कोविड की स्थितियों के कारण खासकर निर्धन परिवारों के बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है. इन परिस्थितियों का लाभ अपराधी और उग्रवादी उठा सकते हैं, जिससे समस्याएं और बढ़ सकती हैं. इन तमाम बातों के मद्देनज़र राज्य के सभी एसपी इस कार्य के लिए लोगों को प्रेरित करें, ऐसे​ निर्देश दिए गए हैं.

क्या सुरक्षित होगा आपका उपकरण जमा करवाना?

डीजीपी और पुलिस विभाग ने इस योजना के लिए पूरा खाका तैयार किया गया है. जमा करवाए जाने वाले सभी उपकरणों से जुड़ी तकनीकी जानकारियों सहित जमा करवाने वाले की जानकारियां भी रिकॉर्ड में रखी जाएंगी और एक रसीद दी जाएगी. इसके बाद उन जरूरतमंद बच्चों को ये उपकरण दिए जा सकेंगे जो आवेदन करेंगे. लेकिन आवेदन के साथ ही उनके स्कूल के प्रिंसिपल की अनुशंसा और स्कूल द्वारा उन बच्चों के परिवार की आय संबंधी हलफनामा लिया जाएगा.