September 17, 2021

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भ्रष्टाचार का गढ़ इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट : रौशन

मोतिहारी । इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के 2 महाविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। पहला एलएस महाविद्यालय तथा दूसरा मुंशी सिंह महाविद्यालय । यह एक ऐसा कोर्स है जो गरीब घर के बच्चे करते और ₹36000 पैसा इकट्ठा करना भी बड़ी समस्या होती है पर यह इस लिए करते हैं ताकि इसके करने के पश्चात तमाम व्यवसाय सरकारी नौकरी एवं गैर सरकारी नौकरी पा सके । पर ऐसा होने का चांस बहुत कम बनता है।एक कारण हायर एजुकेशन पोस्ट ग्रेजुएशन माइक्रोबायोलॉजी(Higher Education Post Graduation Microbiology) इस यूनिवर्सिटी में नहीं है साथ ही ना कोई प्लेसमेंट फैसिलिटी यहां उपलब्ध है ।और सबसे बड़ी नाकामी यह है कि यह एक लैब तथा ट्रेनिंग आधारित कोर्स है। और बात मुंशी सिंह महाविद्यालय (Munshi Singh College)की जाए तो नहीं यहां कभी लैब हुआ और ना ही जॉब ट्रेनिंग ।

बल्कि हर एक साल जॉब ट्रैनिंग है । अब तक तीन प्रधानाचार्य आए और तीनों ने बच्चों को खूब दौड़ाया बहुत आवेदन भी लिखवाएं पर उन आवेदनों के साथ वही हुआ जो लैब में रखें गए माइक्रोस्कोप तथा आवश्यक उपकरणों के साथ होता है । माइक्रोस्कोप की दशा ऐसी है जैसे लगता है कि किसी ने उनके साथ गिल्ली डंडा खेला हो। छात्रों द्वारा आवाज उठाने नेतागिरी कह के लोकतंत्र को बदनाम करने वाले भी हैं। यहां प्रैक्टिकल का नम्बर की धमकी माफियाओं तथा रंगदारी करने वालों की तरह दिया जाता है । सिलेबस तो इनसे कभी पूरा होते ही नहीं है । इसी व्यवस्था को देखकर छात्र परेशान हो जाते है । उक्त आशय की जानकारी इनएसयूआई के जिलाध्यक्ष आशीष कुमार ने दी ।