January 17, 2022

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जहरीली शराब: बाइक चोरी और शराब के बीच गहरा है रिश्ता, एक दूसरे के पूरक हैं दोनों, जरा, समझिए इस खेल को

बिहार:- बिहार में  बाइक चोरी की घटनाएं बहुत बढ़ गई हैं। इसके पीछे शराब धंधेबाज और नेपाल में सप्लाई करने वाला गिरोह है। शराब की खेप पहुंचाने के लिए तस्कर चोरी की बाइक का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में शहर और आसपास से हर दिन औसतन तीन बाइक चोरी हो रही है। दूसरे जिलों में भी यही स्थिति है।तिरहुत रेंज के मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में इस साल आठ माह में 1390 बाइक चोरी की घटनाएं दर्ज हुई हैं। मुजफ्फरपुर में हर महीने औसतन 80 से अधिक बाइक चोरी हो रही है। चोरी की गई बाइकों को बेचने की सबसे बड़ी मंडी नेपाल है। फर्जी स्मार्ट कार्ड बनाकर बाइकें नेपाल में बेची जा रही हैं। इन गाड़ियों की शराब माफिया चोरी करवाते हैं। भीड़-भाड़ वाले कचहरी परिसर, जूरन छपरा और एसकेएमसीएच परिसर से बाइक चोरी सबसे अधिक होती है। कचहरी इलाके से बीते तीन माह में 60 से अधिक बाइक चोरी की घटनाएं नगर थाने में दर्ज कराई गई हैं। शहर में सक्रिय चोर गिरोह से नेपाल के शातिर 10 से 15 हजार रुपए में चोरी की बाइक खरीदते हैं।

शराब की कमाई से होती है खरीदते हैं बाइक, पकड़े जाने पर छोड़ देते हैं  अहियापुर थाना के पटियासा के सुरेश राय की बाइक बीते दो जनवरी को चोरी हो गई थी। इसी बाइक को पुलिस ने 10 जनवरी को मुशहरी में बाइक चोर गिरोह से बरामद किया था। सत्यापन के लिए पुलिस ने बाइक मालिक की खोजबीन की, तब बाइक चोरी की जानकारी हुई। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर सुरेश के आवेदन पर बीते 25 जून को अहियापुर थाने में बाइक चोरी का केस दर्ज किया गया। सुरेश का कहना है कि लंबी प्रक्रिया के बाद कोर्ट के आदेश पर बीते पांच अक्टूबर को बाइक रिलीज हुई। बीते महीने कलमबाग चौक से बाइक चोरी में गिरफ्तार दीपू और बलिराम कुमार ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया था कि चोरी की बाइक नेपाल भेजी जाती है। दोनों ने यह भी बताया कि नेपाल का गिरोह शहर में सक्रिय चोर गिरोह से 10 से 15 हजार रुपए में बाइक खरीदता है। खरीददारों में अधिकांश शराब कारोबारी होते हैं। मुशहरी से बाइक चोरी में गिरफ्तार राहुल, राजकुमार और महादेव से पूछताछ के बाद चोरी की बाइक से शराब सप्लाई किए जाने का खुलासा पुलिस ने किया था। उसने बताया था कि चोरी की बाइक से सप्लाई में पकड़े जाने का डर कम होता है। ये गाड़ियां सस्ती होती हैं जो फंस गयी तो छोड़ दिया जाता है। फिर शराब की कमाई से दूसरी गाड़ी खरीद लिया जाता है।

रिपोर्ट :- चमन सिंह